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पटना के मरीन ड्राइव पर गूंजा ‘जय भवानी, जय शिवाजी’: स्टैच्यू ऑफ गवर्नेंस की मांग को लेकर 10 हजार से अधिक लोगों की विशाल रैली

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पटना के मरीन ड्राइव पर छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य ‘स्टैच्यू ऑफ गवर्नेंस’ की स्थापना और जमीन आवंटन की मांग को लेकर 10 हजार से अधिक लोगों ने विशाल रैली निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। विभिन्न राज्यों से आए समर्थकों ने सरकार से जल्द निर्णय की मांग की।

पटना/आलम की खबर: राजधानी पटना का मरीन ड्राइव रविवार को एक अलग ही दृश्य का गवाह बना, जब हजारों की संख्या में लोगों ने एकत्र होकर छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य ‘स्टैच्यू ऑफ गवर्नेंस’ की स्थापना की मांग को लेकर शक्ति प्रदर्शन किया। इस विशाल रैली में 10 हजार से अधिक महिला-पुरुषों की भीड़ शामिल हुई, जिन्होंने पूरे इलाके को “जय भवानी, जय शिवाजी” के गगनभेदी नारों से गूंजा दिया। गंगा तट से लेकर मरीन ड्राइव तक आस्था, इतिहास और राजनीतिक संदेश का अनोखा संगम देखने को मिला।

यह पूरा कार्यक्रम ‘छत्रपति शिवाजी महाराज सामाजिक समरसता अभियान’ के तहत आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य पटना में शिवाजी महाराज की एक गगनचुंबी प्रतिमा स्थापित करने के लिए भूमि आवंटन की मांग को और मजबूत करना बताया गया। रैली में शामिल लोग हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील कर रहे थे। आयोजन स्थल पर माहौल पूरी तरह उत्साह, नारों और सांस्कृतिक एकता के रंग में रंगा रहा।

गंगा स्नान से शुरू हुआ आंदोलन, संकल्प के साथ आगे बढ़ा कारवां

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह गंगा स्नान और संकल्प के साथ हुई, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने पवित्र स्नान कर इस आंदोलन को एक धार्मिक और सांस्कृतिक रूप देने की कोशिश की। इसके बाद लोगों ने निर्धारित स्थल पर एकत्र होकर ‘स्टैच्यू ऑफ गवर्नेंस’ की स्थापना को जनआंदोलन का रूप दे दिया। समर्थकों ने शिवाजी महाराज के आदर्शों को याद करते हुए उनके प्रशासनिक मॉडल, ग्राम स्वराज और स्वराज्य की अवधारणा को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया।

भीड़ में सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली से आए समर्थक भी शामिल हुए, जिससे यह रैली केवल एक स्थानीय आंदोलन न होकर राष्ट्रीय स्वरूप लेती दिखाई दी। विभिन्न राज्यों से आए लोगों ने एक स्वर में मांग की कि बिहार सरकार को इस परियोजना के लिए शीघ्र भूमि आवंटित करनी चाहिए।

मरीन ड्राइव पर जनसैलाब, प्रशासन भी रहा सतर्क

पटना का मरीन ड्राइव क्षेत्र इस विशाल जनसैलाब को देखकर कुछ समय के लिए पूरी तरह बदल गया। सड़क पर मानव श्रृंखला जैसी स्थिति बन गई और चारों तरफ सिर्फ झंडे, पोस्टर और नारों की गूंज सुनाई दे रही थी। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन भी मौके पर मुस्तैद रहा ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

रैली में शामिल लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखी, हालांकि भीड़ का आकार इतना बड़ा था कि यातायात व्यवस्था पर अस्थायी प्रभाव पड़ा। स्थानीय लोगों को भी कुछ समय के लिए मार्ग परिवर्तन की स्थिति का सामना करना पड़ा।

‘शिवाजी महाराज की विचारधारा आज भी प्रासंगिक’ – आयोजक

कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे भाजपा नेता प्रणव प्रकाश ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक संपूर्ण प्रशासनिक विचारधारा के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि शिवाजी का ‘गवर्नेंस मॉडल’ आज भी आत्मनिर्भर भारत और ग्राम स्वराज की नींव को मजबूत करता है। उनके अनुसार यदि युवा पीढ़ी शिवाजी महाराज के आदर्शों को अपनाए, तो समाज में समानता, न्याय और सशक्तिकरण की भावना और मजबूत होगी।

प्रणव प्रकाश ने स्पष्ट कहा कि यह मांग किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही इस प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय लेगी और भूमि आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

‘जन-जन की मांग बन रहा है यह आंदोलन’

रैली के दौरान आयोजकों ने यह भी दावा किया कि यह अब केवल एक संगठन या समूह की मांग नहीं रह गई है, बल्कि बिहार के कई जिलों में यह जनभावना का रूप ले चुकी है। समर्थकों का कहना था कि आने वाले समय में गांव-गांव जाकर इस विचारधारा को फैलाया जाएगा और अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाएगा।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने यह भी कहा कि छत्रपति छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा स्थापित होने से बिहार में पर्यटन, सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक चेतना को भी नई दिशा मिलेगी।

‘स्टैच्यू ऑफ गवर्नेंस’ को लेकर बढ़ता समर्थन

आयोजकों का मानना है कि प्रस्तावित ‘स्टैच्यू ऑफ गवर्नेंस’ केवल एक प्रतिमा नहीं बल्कि एक विचार का प्रतीक होगा, जो प्रशासनिक पारदर्शिता, जनभागीदारी और सुशासन को दर्शाएगा। रैली में शामिल युवाओं और महिलाओं ने भी कहा कि यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

भीड़ में मौजूद लोगों ने बार-बार यह मांग दोहराई कि सरकार को जल्द से जल्द भूमि चिन्हित कर इस परियोजना को मंजूरी देनी चाहिए, ताकि इसका निर्माण कार्य शुरू हो सके।

आगे की रणनीति और आंदोलन का विस्तार

आयोजकों ने संकेत दिया कि यदि सरकार की ओर से जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा। इसके तहत राज्यभर में जनजागरण अभियान, रैलियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना भी बनाई जा रही है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों और उनकी प्रशासनिक सोच को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य जारी रखेंगे।

मरीन ड्राइव पर आयोजित यह विशाल रैली न केवल एक राजनीतिक संदेश थी, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की स्मृति और उनकी विचारधारा आज भी समाज में गहरी पकड़ रखती है।

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